गिग वर्कर्स

वैश्विक परिप्रेक्ष्य में 'गिग वर्कर्स' : आधुनिक रोजगार का                                  नया चेहरा और चुनौतियाँ

                                      🖋️प्रोफेसर (डॉ) मुकेश जैन

          गिग वर्कर्स, जिन्हें लचीले रोजगार में लगे श्रमिक कहा जाता है, अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देने के बावजूद  अस्थायी श्रमिकों की श्रेणी में ही शामिल रहते हैं। ये श्रमिक विकसित और विकासशील दोनों प्रकार के देशों में शहरीकरण और सेवा क्षेत्र के विकास के प्रमुख चालक बन गए हैं। रोजगार की तलाश में शहरों में आए लाखों लोग बदलते दौर के व्यवसाय के लिए कार्यबल की आवश्यकता के सेवा पूर्तिकर्ता के रूप में उपलब्ध हैं। इन श्रमिकों को वैश्विक समस्याओं के साथ-साथ स्थानीय अनेक चुनौतियों का भी सामना करना पड़ता है। जिसके कारण अब गिग वर्कर्स सक्रिय रूप से संगठित होकर बेहतर भुगतान, कार्य सुरक्षा और उचित कार्य दशाओं की मांग को लेकर हड़तालें और आंदोलन कर रहे हैं। धीरे-धीरे, स्थानीय स्तर पर विभिन्न देशों की सरकारों का ध्यान इनकी समस्याओं की ओर गया है, इनकी मानवीय कार्य दशाओं एवं इनके कल्याण पर ध्यान देने की आवश्यकता महसूस की जाने लगी है। 

गिग वर्कर्स कौन हैं? (Who are Gig Workers?):

        गिग वर्कर्स वे स्वतंत्र ठेकेदार, फ्रीलांसर, या अस्थायी श्रमिक हैं जो अल्पकालिक कार्यों या "गिग्स" (Gigs) में संलग्न होते हैं। यह पारंपरिक स्थायी, पूर्णकालिक नौकरी के विपरीत एक लचीला कार्य मॉडल है।

मुख्य विशेषताएं:

1- इनमें से अधिकांश काम ऑनलाइन प्लेटफॉर्म (जैसे Uber, Ola, Swiggy, Zomato, Urban Company, Upwork, Fiverr) के माध्यम से मिलता है। 

2- काम के समय और स्थान पर उनका नियंत्रण नहीं होता। 

3- उन्हें प्रति कार्य, प्रति डिलीवरी, या प्रति प्रोजेक्ट के आधार पर भुगतान मिलता है, न कि निश्चित वेतन के रूप में। 

4- वे आमतौर पर कंपनी के कर्मचारी नहीं होते, इसलिए उन्हें पारंपरिक कर्मचारियों जैसे लाभ (जैसे PF, ग्रेच्युटी, स्वास्थ्य बीमा) नहीं मिलते।

गिग वर्कर्स के प्रमुख प्रकार:

1. प्लेटफॉर्म-आधारित श्रमिक: 

 कैब ड्राइवर (Uber, Ola), डिलीवरी बॉय (Swiggy, Zomato), घरेलू सेवा प्रदाता (Urban co.)। यह सबसे दृश्यमान समूह है जो ओला, उबर, जोमैटो, स्विगी, अर्बन कंपनी जैसे ऐप्स के माध्यम से कार्य करते हैं।

2. गैर-प्लेटफ़ॉर्म गिग वर्कर: 

पारंपरिक क्षेत्रों में अंशकालिक या कार्य-आधारित अनुबंध पर कार्य करने वाले, जैसे सफाई कर्मी आदि। ये ज्यादातर सेवा क्षेत्र, ई-कॉमर्स, परिवहन, फूड डिलीवरी आदि में कार्यरत होते हैं।

3. ऑनलाइन फ्रीलांसर: 

ग्राफिक डिजाइनर, लेखक, प्रोग्रामर, डेटा एंट्री ऑपरेटर (Upwork, Fiverr जैसे प्लेटफॉर्म पर ट्यूटर)। डिजाइन, कोडिंग, लेखन, माइक्रो-टास्किंग: डेटा एंट्री, ऑनलाइन सर्वेकार्य में लगे व्यक्ति।

4. पारंपरिक गिग वर्कर:

मिस्त्री, इलेक्ट्रीशियन, प्लंबर, ट्यूशन टीचर जो ऑफलाइन तरीके से काम ढूंढते हैं।

मुख्य समस्याएं (Key Challenges):

1. आय में अनिश्चितता: कोई निश्चित वेतन नहीं। कमीशन संरचना में बदलाव से आप्रभावित होती है।

2. सामाजिक सुरक्षा का अभाव: स्वास्थ्य बीमा, पेंशन, भविष्य निधि (PF), पैतृक अवकाश जैसे लाभ नहीं मिलते।

3. कार्य स्थितियाँ: लंबे समय तक काम, थकान, सड़क दुर्घटनाओं का जोखिम, ग्राहकों के साथ दुर्व्यवहार।

4. प्लेटफॉर्म निर्भरता: एल्गोरिदम द्वारा नियंत्रण, रेटिंग सिस्टम का दबाव, बिना बताए एकाउंट बंद होना।

5. कैरियर की गतिशीलता का अभाव: कौशल विकास के अवसर सीमित हैं, करियर में उन्नति का कोई clear रास्ता नहीं है।

विभिन्न देशों में स्थिति (Position in Different Countries):

        गिग इकोनॉमी का आकार और श्रमिकों की स्थिति देशों के अनुसार काफी भिन्न होती है। देश गिग वर्कर्स का अनुमानित आकार / डेटा विनियमन और स्थिति को यहाँ स्पष्ट किया जा रहा है।

भारतवर्ष :

7.7 मिलियन (2020-21, NITI Aayog रिपोर्ट)। 2030 तक 23.5 मिलियन तक पहुँचने का अनुमान।

स्थिति: अधिकांश गिग वर्कर्स स्वतंत्र ठेकेदार माने जाते हैं। हाल में हुई प्रगति के अनुसार सामाजिक सुरक्षा कोड, 2020 लागू हुआ, जो प्लेटफॉर्म्स को एक छोटा प्रतिशत देकर सामाजिक सुरक्षा फंड बनाने के लिए कहता है, लेकिन यह अभी पूरी तरह से लागू नहीं हुआ है।

संयुक्त राज्य अमेरिका:

59 मिलियन (2017, Upwork और Freelancers Union)। यह अमेरिकी कार्यबल का 36% है।

स्थिति: कैलिफोर्निया जैसे राज्यों ने "ABC टेस्ट" के साथ AB5 कानून पारित किया, जो श्रमिकों को कर्मचारी मानने के लिए मजबूर करता है। हालाँकि, Uber और Lyft जैसी कंपनियों ने प्रोपोजिशन 22 के माध्यम से इसका विरोध किया और अपने ड्राइवरों को स्वतंत्र ठेकेदार बनाए रखा।

यूनाइटेड किंगडम:

4.4 मिलियन (2019, ONS)। यह UK के कार्यबल का 6.5% है।

स्थिति: UK की सुप्रीम कोर्ट ने एक Landmark फैसले में Uber ड्राइवरों को "वर्कर्स" (कर्मचारी और स्वतंत्र ठेकेदार के बीच की एक विशेष श्रेणी) के रूप में मान्यता दी। इससे उन्हें न्यूनतम मजदूरी और छुट्टी के अधिकार मिलते हैं, लेकिन पूर्ण कर्मचारी लाभ नहीं।

यूरोपीय संघ:

28 मिलियन (2019)।

स्थिति: EU गिग वर्कर्स के अधिकारों के लिए मजबूत नियमों पर काम कर रहा है। प्रस्तावित नियमों में यह साबित करने की जिम्मेदारी प्लेटफॉर्म पर डाली गई है कि श्रमिक स्वतंत्र ठेकेदार हैं, न कि कर्मचारी। इससे सामाजिक सुरक्षा का दायरा बढ़ेगा।

ब्राजील:

डिलीवरी और राइड-हेलिंग में लाखों श्रमिक।

स्थिति: ब्राजील में गिग वर्कर्स सक्रिय रूप से संगठित हो रहे हैं और हड़तालें कर रहे हैं। वे बेहतर भुगतान, सुरक्षा और एल्गोरिदम में पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं।

चीन:

पैमाना: चीन में गिग वर्कर्स की संख्या विशाल है। 2022 के आंकड़ों के अनुसार, चीन में लगभग 200 मिलियन (20 करोड़) लोग इस क्षेत्र में कार्यरत हैं। यह संख्या भारत के अनुमानित (7.7 करोड़) से लगभग ढाई गुना और अमेरिकी (5.9 करोड़) आंकड़े से तीन गुना से अधिक है।

स्थिति: चीन में गिग वर्कर्स को आमतौर पर “लचीले रोजगार कर्मचारी” (flexible employment employee) यानी “लचीले रोजगार में लगे श्रमिक” कहा जाता है। यह क्षेत्र शहरीकरण और सेवा क्षेत्र के विकास का एक प्रमुख चालक है, जो लाखों लोगों, विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों से शहरों में आए प्रवासियों, के लिए रोजगार का स्रोत बना हुआ है। प्लेटफॉर्म्स का एल्गोरिदम अत्यंत कठोर है। डिलीवरी राइडर्स के लिए समय सीमा बहुत tight होती है। देरी होने पर जुर्माना लगता है और रेटिंग गिरती है। एक विस्तृत documentary “और ये कहाँ जा रहे हैं?” (Are You Happy?) ने डिलीवरी राइडर्स पर इस जानलेवा दबाव को बहुत प्रसिद्धि से दिखाया था।

1. सामाजिक सुरक्षा का अभाव (Lack of Social Security):

         भारत और अमेरिका की तरह, अधिकांश श्रमिकों को पारंपरिक कर्मचारी लाभ नहीं मिलते। हालांकि, चीन की सरकार ने “लचीले रोजगार” वालों के लिए स्वैच्छिक पेंशन और स्वास्थ्य बीमा योजनाएँ शुरू की हैं, लेकिन इनका दायरा अभी सीमित है और कई श्रमिक अंशदान देने में असमर्थ हैं या योगदान नहीं करना चाहते।

2. अधिक काम के घंटे और थकान (Long Working Hours and Fatigue):

         अच्छी कमाई के लिए, श्रमिकों को अक्सर 12-14 घंटे प्रतिदिन, सप्ताह में 7 दिन काम करना पड़ता है, जिससे गंभीर थकान और स्वास्थ्य जोखिम पैदा होते हैं।

3. प्लेटफॉर्म की शक्ति और नीतियों में मनमानी (Platform Power and Arbitrary Policies):

        प्लेटफॉर्म बिना चेतावनी के भुगतान की दरें और incentive structures बदल सकते हैं, जिससे श्रमिकों की आय अचानक कम हो जाती है। शिकायत दर्ज करने के तंत्र अक्सर अपर्याप्त होते हैं।

चीनी सरकार की भूमिका और हस्तक्षेप (Role and Intervention of the Chinese government): 

        चीन की सरकार इस क्षेत्र को सक्रियता से regulate कर रही है, यह प्रयास इसे अन्य देशों से अलग करता है।

1. कंपनियों पर नियंत्रण (Crackdown on Tech Companies):

   2020-21 में, सरकार ने डीडी (DiDi) जैसी बड़ी टेक कंपनियों पर एंटी-मोनोपॉली नियमों का उल्लंघन करने और डेटा सुरक्षा नियमों का पालन न करने का आरोप लगाकर कड़ा रुख अपनाया। इससे इन कंपनियों की शक्ति पर अंकुश लगाने का प्रयास किया गया।

2. श्रमिक अधिकारों के लिए दिशा-निर्देश (Guidelines for Worker Rights):

       2021 में, कई मंत्रालयों (Transport) ने संयुक्त रूप से डिलीवरी और ride-hailing प्लेटफॉर्म के लिए दिशा-निर्देश जारी किए। इनमें शामिल था:

     न्यूनतम आय की गारंटी: प्लेटफॉर्म्स को यह सुनिश्चित करना होगा कि श्रमिकों की आय स्थानीय न्यूनतम मजदूरी से कम न हो।

     अधिक काम के घंटों पर रोक: श्रमिकों के लिए आराम के समय का प्रावधान।

     पारदर्शिता: एल्गोरिदम और भुगतान संरचना के बारे में श्रमिकों को सूचित करना।

     वाणिज्यिक बीमा का विस्तार: श्रमिकों के लिए दुर्घटना बीमा को बढ़ावा देना।

3. सामाजिक सुरक्षा का विस्तार (Expanding Social Security Nets):

         सरकार “लचीले रोजगार” वालों को बुनियादी पेंशन और स्वास्थ्य बीमा कवरेज में शामिल करने के तरीकों पर काम कर रही है, ताकि सामाजिक स्थिरता बनी रहे।

सुझाव (Suggestions):

गिग इकोनॉमी को और अधिक न्यायसंगत और टिकाऊ बनाने के लिए निम्नलिखित सुझाव दिए जा सकते हैं:

1. सरकार के लिए:

स्पष्ट परिभाषा और विनियमन: "गिग वर्कर" की एक कानूनी परिभाषा तय करना जो उन्हें "कर्मचारी" और "स्वतंत्र ठेकेदार" के बीच एक तीसरी श्रेणी में रखे, जैसा कि UK में है।

सामाजिक सुरक्षा का सार्वभौमीकरण: सामाजिक सुरक्षा कोड को प्रभावी ढंग से लागू करना। एक पोर्टेबल सामाजिक सुरक्षा प्रणाली बनाई जा सकती है जहाँ श्रमिक अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर काम करने के बावजूद अपने लाभ जमा कर सकें।

न्यूनतम मजदूरी की गारंटी: प्लेटफॉर्म्स के लिए एक "नीचे की ओर सीमा" (floor wage) निर्धारित करना, यह सुनिश्चित करना कि श्रमिकों की प्रति घंटा कमाई एक निश्चित threshold से कम न हो।

एल्गोरिदमिक पारदर्शिता: यह सुनिश्चित करना कि श्रमिकों को पता हो कि भुगतान, रेटिंग और कार्य आवंटन का एल्गोरिदम कैसे काम करता है और उनके पास शिकायत दर्ज करने का एक clear तरीका हो।

2. प्लेटफॉर्म कंपनियों के लिए:

उचित कमीशन संरचना: श्रमिकों के लिए एक न्यायसंगत और पारदर्शी राजस्व-साझाकरण मॉडल अपनाना।

स्वास्थ्य और दुर्घटना बीमा: सभी सक्रिय श्रमिकों के लिए समूह स्वास्थ्य बीमा और दुर्घटना कवर प्रदान करना।

कौशल विकास: श्रमिकों के कौशल को बढ़ाने और उन्हें उच्च-आय वाले गिग्स की ओर बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करना।

शिकायत निवारण तंत्र: एक निष्पक्ष और त्वरित शिकायत निवारण तंत्र स्थापित करना।

3. गिग वर्कर्स स्वयं के लिए:

संगठन और एकजुटता: यूनियनों या सामूहिक समूहों में शामिल होकर सामूहिक सौदेबाजी की शक्ति का निर्माण करना।

कौशल विविधीकरण: केवल एक प्लेटफॉर्म पर निर्भर न रहते हुए multiple skills सीखना ताक आय के स्रोत बढ़ सकें।

वित्तीय नियोजन: अनिश्चित आय के अनुरूप अपने खर्चों की योजना बनाना और जरूरत पड़ने पर emergency fund बनाना।

इस तरह निम्नलिखित उपाय किए जाने की प्रत्येक स्तर पर तत्काल आवश्यकता है:

- सामाजिक सुरक्षा और न्यूनतम वेतन की गारंटी हेतु क़ानूनी कवच तैयार किया जाए।

- गिग वर्कर्स के पंजीकरण, पारदर्शिता, और डेटा-सुरक्षा के लिए स्पष्ट नियम बनें।

- स्वास्थ्य बीमा और आपातकालीन सहायता योजनाएँ लागू हों।

- सामूहिक सौदेबाजी और यूनियन का अधिकार दें।

- एल्गोरिदमिक निर्णयों में पारदर्शिता और जिम्मेदारी सुनिश्चित हो।

- कंपनियों और सरकारों को मिलकर कल्याण फंड तैयार करना चाहिए।

        गिग इकॉनमी वैश्विक स्तर पर रोजगार का बड़ा आधार बना रही है, अतः श्रमिकों के हितों की रक्षा के लिए तत्काल नीति-सुधार आवश्यक हैं।

निष्कर्ष:

        गिग इकोनॉमी भविष्य का work model है जो भविष्य की आशा  है। यह रोजगार सृजन और लचीलेपन के अवसर प्रदान करती है, लेकिन साथ ही यह श्रमिकों को अनिश्चितता और सुरक्षा के अभाव में छोड़ देती है। सही संतुलन बनाने के लिए सरकार, प्लेटफॉर्म कंपनियों और श्रमिकों के बीच सहयोग आवश्यक है ताकि आर्थिक विकास का लाभ सभी में न्यायपूर्ण ढंग से वितरित हो सके।बिल्कुल। चीन की गिग इकोनॉमी दुनिया में सबसे बड़ी और सबसे तेजी से विकसित होने वाली में से एक है, लेकिन यह अपने अनूठी चुनौतियों और सरकार के हस्तक्षेप का भी सामना कर रही है।

            चीन की गिग इकोनॉमी एक विरोधाभास है। एक तरफ, यह आर्थिक विकास और रोजगार सृजन का एक शक्तिशाली इंजन है, जो सैकड़ों millions को रोजगार देती है। दूसरी तरफ, यह कठोर एल्गोरिदमिक प्रबंधन, अनिश्चित आय, और सीमित सामाजिक सुरक्षा से जूझ रही है। अन्य लोकतांत्रिक देशों के विपरीत, जहाँ श्रमिक संघर्ष और न्यायालयीन हस्तक्षेप प्रमुख हैं, चीन में केंद्र सरकार का top-down regulation प्रमुख तरीका है। सरकार का लक्ष्य टेक कंपनियों की शक्ति को कम करते हुए, श्रमिकों को एक बुनियादी सुरक्षा कवच प्रदान करना है, ताकि सामाजिक स्थिरता बनी रहे और अर्थव्यवस्था का विकास जारी रहे। हालाँकि, इन नीतियों का व्यवहारिक क्रियान्वयन और प्रभावशीलता अभी भी एक चुनौती बनी हुई है।

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