02- “अपने विचार, अपना उपचार": स्व-परिवर्तन के सूत्र – मन, भावना और चेतना का एकीकरण
पुनश्च:
-:शुरूआती संदेश:
"अपने विचार, अपना उपचार"- मनोवैज्ञानिक समझ और आध्यात्मिक चेतना का संगम
प्रिय आत्मजन,
जीवन की आपाधापी और रोजमर्रा के संघर्षों के बीच, अक्सर हम बाहर समाधान तलाशते रहते हैं। लेकिन पिछले कुछ समय के गहन चिंतन, मौन और व्यक्तिगत अनुभवों ने मुझे एक नई समझ की ओर जाने के लिए प्रेरित किया है—यह समझ एक ऐसा सत्य है जो हमारे अस्तित्व की गहराइयों में उपस्थित है।
इसी आत्म-मंथन और आत्म-अनुभव (Self-Realization) से उपजी अनुभूतियों को आप सभी के साथ साझा करने की तीव्र इच्छा के वशीभूत होकर, मैं यह लेख श्रृंखला "अपने विचार, अपना उपचार" प्रस्तुत कर रहा हूँ।
यह मात्र शब्दों का संग्रह नहीं है, बल्कि मनोवैज्ञानिक समझ और आध्यात्मिक चेतना के संगम से उपजी एक अंतर्दृष्टि है।
हम इस श्रृंखला में क्या खोजेंगे?
- विचारों की रसायन विद्या (Alchemy of Thoughts): कैसे हमारे अवचेतन में पनपने वाला एक छोटा सा विचार हमारे स्वास्थ्य, संबंधों और भाग्य को निर्मित करता है?
- स्व-उपचार की शक्ति (Power of Self-Healing): मनोविज्ञान और आध्यात्मिकता के सिद्धांतों का उपयोग करके हम कैसे अपनी मानसिक और भावनात्मक गुत्थियों को स्वयं सुलझा सकते हैं?
- वर्तमान में जीना (Carpen diem) : बीते कल के बोझ और आने वाले कल की चिंता से मुक्त होकर, 'अभी' के इस जादुई क्षण में पूर्णता को अनुभव कैसे करें?
यह श्रृंखला एक आमंत्रण है—अपने भीतर झांकने का, अपनी असीम मानसिक शक्ति को पहचानने का, और स्वयं अपने जीवन के रचयिता बनने का।
आइए, इस मनोवैज्ञानिक-आध्यात्मिक यात्रा पर एक साथ चलें। हर लेख एक नया कदम होगा, एक नई शुरुआत होगी, और स्वयं से स्वयं की एक नई मुलाकात होगी। मैं अपने इन विचारों को और शब्दों का यह संग्रह आवश्यकतानुसार 'कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों' (Artificial Intelligence Tools) से परिष्कृत भी करता गया हूं।
इस यात्रा में मेरे साथ अब चलिए द्वितीय सोपान पर...
शुभकामनाओं सहित,
- प्रोफेसर (डॉ) मुकेश जैन-
🙏🙏🙏
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शाश्वत यात्रा: हर पल नई शुरुआत
जीवन की अनंतता में हम स्थित हैं। यह क्षण, ठीक अभी, जहाँ हम हैं, वहाँ सब कुछ संपूर्ण और परिपूर्ण है—फिर भी यह जीवन निरंतर बदलता रहता है। यह विरोधाभास ही हमारे अस्तित्व की सबसे बड़ी सच्चाई है।
यहाँ न कोई आरंभ है, न कोई अंत। केवल अस्तित्व और अनुभवों का एक अनवरत चक्र है—एक पुनर्चक्र जो हमें बार-बार नए रूपों, नए दृष्टिकोणों से परिचित कराता है। जीवन कभी रुकता नहीं, कभी ठहरता नहीं। वह नीरस नहीं है, क्योंकि हर क्षण सदैव नया और नूतन है। हर सांस एक नई संभावना लेकर आती है।
हम उस अनंत शक्ति के साथ एकाकार हैं, जिसने हमें बनाया। और यही शक्ति हमें अपनी परिस्थितियों का सृजन करने की क्षमता प्रदान करती है। जरा सोचिए—आपके पास अपनी इच्छानुसार प्रयोग करने के लिए मस्तिष्क की अपार शक्ति है। यह ज्ञान ही आनंद का स्रोत है।
आप अपने जीवन के लेखक हैं, केवल दर्शक नहीं। हर क्षण एक नई शुरुआत है। जैसे हम पुराने से नए की ओर बढ़ते हैं, वैसे ही हर बार हम एक नए बिंदु पर खड़े होते हैं। कल की थकान, बीते कल के पछतावे—वे सब अब केवल कहानियाँ हैं। आज, इसी क्षण, आपके लिए आरंभ करने का एक नया बिंदु है।
आपकी दुनिया में सब कुछ अच्छा है। यह कोई भोली आशावादिता नहीं, बल्कि एक गहरा सत्य है। क्योंकि “अच्छा” का अर्थ केवल सुखद नहीं है; इसका अर्थ है—हर घटना, हर चुनौती, हर परिवर्तन आपके विकास के लिए है। जब आप यह समझ लेते हैं, तो हर परिस्थिति एक उपहार बन जाती है।
तो आज, इसी क्षण, अपने भीतर उस शक्ति को पहचानें। अपनी मानसिक शक्ति का उपयोग एक नई दिशा में करें। एक नया विचार बोएँ, एक नया कर्म शुरू करें। याद रखें—आप अनंतता का हिस्सा हैं, और अनंतता आपका हिस्सा है। आप रुकें नहीं, आप बहते हैं और इस बहाव में ही आपकी सच्ची पूर्णता है।
तुम्हारी समस्या तुम्हारे भीतर है, और समाधान भी वहीं है – तुम्हारे मस्तिष्क में:
बहुत बार हम यह भूल जाते हैं कि हम जिस समस्या से जूझ रहे हैं, वह बाहर नहीं, बल्कि हमारे अपने मस्तिष्क में जीवित है। हाँ, यह सच है। कोई परिस्थिति तब तक समस्या नहीं बनती, जब तक हमारा मन उसे समस्या का रूप न दे दे। यदि समस्या तुम्हारे मस्तिष्क में जी रही है, तो उसका समाधान भी वहीं मौजूद है। तुम्हें बस उसे खोजने का साहस और तरीका जानना है।
जीवन में हर काम को पूर्णता के साथ करने की आदत डालो
पूर्णता का अर्थ है – बिना किसी आधे-अधूरे प्रयास के, बिना किसी नकारात्मक बहाने के। जब तुम किसी कार्य को पूर्ण समर्पण और एकाग्रता से करते हो, तो समाधान स्वयं प्रकट होने लगता है।
और वह समाधान कहाँ छिपा है?
वह तुम्हारे सकारात्मक, रचनात्मक और सत्यात्मक विचारों के भीतर है। ये तीनों विचारों की वह शक्ति हैं, जो किसी भी समस्या की जड़ को काट सकती है।
तो अब से नियम बना लो:
- अपने मस्तिष्क को शांतिपूर्ण अनुभवों से सींचो ध्यान करो, प्रकृति के बीच समय बिताओ, उन लम्हों को याद करो जब तुम पूरी तरह शांत थे।
- अपने मन को आशावादी शब्दों से भरो हर सुबह खुद से कहो – “आज का दिन नए अवसर लेकर आया है। मैं हर चुनौती को पार कर सकता हूँ।”
- अपने विचारों में सत्यता को जगह दो न तो दूसरों को धोखा दो, न अपने आप को। सत्य के विचार ही वह नींव हैं, जिस पर अटल समाधान खड़े होते हैं।
जब तुम ऐसा करोगे, तो धीरे-धीरे तुम्हारे पास एक सुंदर, विशाल, आश्चर्यजनक विचारों का भंडार तैयार हो जाएगा। यह भंडार कोई साधारण संग्रह नहीं है – यह शक्ति का वह बहुत बड़ा स्रोत है, जो तुम्हें कभी थकने नहीं देगा। यह तुम्हारी आंतरिक बैटरी है, जो हर मुश्किल घड़ी में रिचार्ज हो जाती है।
और फिर होता है विचार मंथन। जब तुम अपने ही सकारात्मक, सच्चे और रचनात्मक विचारों को मथते हो, तो उसमें से एक नया चमत्कार जन्म लेता है। वह चमत्कार है – एक ऐसा समाधान, जिसकी कल्पना तक तुमने नहीं की थी। एक ऐसा रास्ता, जो असंभव लगता था। एक ऐसा अवसर, जो खुद ब खुद दरवाजा खटखटाता है।
अब बड़ा सवाल है– कौन इस जीवन को जी सकता है?
उत्तर है: वही, जो स्वस्थ और प्रसन्न चित्त जीवन जीना चाहता है।
यदि, तुम सच में चाहते हो कि तुम्हारा मन हल्का रहे, शरीर ऊर्जावान रहे और हर दिन एक उत्सव लगे – तो तुम्हें अपने विचारों की गुणवत्ता बदलनी होगी। हैप्पी थॉट्स यानी ‘खुश विचार’ ही तुम्हारा मार्गदर्शक बनें।
जब तुम अपने मस्तिष्क में रचनात्मक, सकारात्मक और सत्यात्मक विचारों को स्थायी रूप से जगह देते हो, तो वे विचार तुम्हारे भविष्य की दिशा को स्वतः निर्देशित करने लगते हैं। तुम्हें किसी बाहरी गुरु की आवश्यकता नहीं रहती – तुम्हारे भीतर ही वह प्रकाश है, वह कम्पास है, वह शक्ति है।
आईए एक छोटा सा प्रयास करें:
1. आज रात सोने से पहले, अपने मन में उन तीन बातों को दोहराओ जो तुम्हारे पास अच्छी हैं।
2. कल सुबह उठते ही कहो – “मेरे अंदर सब समाधान है। मेरा मस्तिष्क शांति, सत्य और रचनात्मकता से भरा है।”
3. पूरे दिन जब भी कोई समस्या आए, पहले खुद से पूछो –“क्या यह समस्या मेरे मन में है या वास्तव में?” और फिर उसी पल उसके सकारात्मक पक्ष को देखने का प्रयास करो।
याद रखो – बाहर की दुनिया तो बस एक प्रतिबिंब है। असली युद्ध और असली जीत दोनों तुम्हारे मस्तिष्क के भीतर हैं। अपने मस्तिष्क को स्वर्ग बनाओ, तो हर समस्या चमत्कार में बदल जाएगी।
"शाश्वत यात्रा: हर पल नई शुरुआत" अत्यंत गहन और प्रेरक है। अब मैं इसे उदाहरणों के माध्यम से समझाते हुए विस्तार एवं व्यावहारिकता के साथ प्रस्तुत कर रहा हूँ।
1. "हर पल नई शुरुआत" –
सिद्धांत: जीवन में न कोई आरंभ है, न अंत; केवल अनवरत बहाव है। हर क्षण आप नए हो सकते हैं। 'शुद्धिकरण' (Refining) प्रगति के लिए अनिवार्य है।
➤ उदाहरण: कल्पना करें कि आप एक नदी में खड़े हैं। आप एक ही स्थान पर खड़े हैं, फिर भी हर पल नया पानी आपके पैरों को छू रहा है। पुराना पानी बह चुका। ठीक वैसे ही, आपका मन एक ही है, लेकिन हर सांस में नए विचार, नई भावनाएँ आती हैं। यदि आपने कल कोई गलती की, तो वह पानी बह गया। अब इस क्षण में आप पूरी तरह से नए हैं।
हम पुरानी गलतियों, पिछले दुखों को लेकर चलते हैं। लेकिन जैसे हवाई जहाज उड़ान भरने से पहले अपना पुराना ईंधन नहीं रखता, वैसे ही आपको हर सुबह अपने मन का पुराना बोझ उतार देना चाहिए। "कल की उड़ान के लिए, आज के मन को उन बोझों से मुक्त करना जरूरी है जो आपको भारी कर रहे हैं।" आप वही हो सकते हो जो तुम इस क्षण चुनते हो – चाहे कल कुछ भी हुआ हो।
2. "आप लेखक हैं, दर्शक नहीं" –
सिद्धांत: आप अपने जीवन के लेखक हैं, हर पल एक नया पन्ना लिख सकते हैं।
➤ उदाहरण: मान लीजिए एक फिल्म में अभिनेता को एक दुखद सीन करना है। वह रोता है, चिल्लाता है, लेकिन निर्देशक के "कट" कहते ही वह तुरंत सामान्य हो जाता है। वह जानता है कि यह सिर्फ एक दृश्य था। हम अक्सर अपने जीवन के उस अभिनेता को भूल जाते हैं। हम सोचते हैं कि जो दृश्य चल रहा है, वही पूरी सच्चाई है। लेकिन असली निर्देशक और लेखक आप हैं। आप किसी भी दृश्य को बदल सकते हैं – बस एक नए विचार के साथ।
यदि आपको लगता है कि आप "असफल" हैं, तो यह एक दृश्य है। आप उसी पल एक नया संवाद लिख सकते हैं: "मैं सीख रहा हूँ। मैं अगली बार बेहतर करूँगा।" यह छोटा सा परिवर्तन पूरी फिल्म की दिशा बदल देता है।
3. "हर घटना विकास के लिए है" –
सिद्धांत: "आपकी दुनिया में सब कुछ अच्छा है" – इसका अर्थ है कि हर चुनौती, हर दर्द, हर बदलाव आपके विकास के लिए है।
➤ उदाहरण: बीज को अंकुरित होने के लिए अंधेरी, नम, दबी हुई मिट्टी में रहना पड़ता है। वहाँ वह अकेला, असहाय महसूस करता है। लेकिन यही अंधकार और दबाव उसे तोड़कर बाहर निकलने की शक्ति देता है। यदि बीज शिकायत करता, "मैं यहाँ अंधेरे में क्यों हूँ?" तो वह कभी पौधा न बन पाता।
जब आप किसी कठिनाई से गुजरते हैं – जैसे नौकरी छूटना, बीमारी, रिश्ता टूटना – तो समझें कि यह मिट्टी का अंधकार है। यह आपको तोड़ रहा है, लेकिन एक नए रूप में जन्म लेने के लिए। सवाल यह नहीं कि "यह क्यों हुआ", बल्कि "यह मुझमें क्या विकसित कर रहा है?"
4. "समस्या मस्तिष्क में है, समाधान भी वहीं" –
सिद्धांत: कोई परिस्थिति तब तक समस्या नहीं होती, जब तक आपका मन उसे समस्या न कहे।
➤ उदाहरण: दो व्यक्ति एक ही भीड़-भाड़ वाली ट्रेन में यात्रा कर रहे हैं। एक कहता है, "कितना गंदा, शोरगुल, परेशानी है।" दूसरा कहता है, "देखो कितने तरह के लोग, कितने चेहरे, कितनी कहानियाँ। दिलचस्प है!" ट्रेन वही है, भीड़ वही है। समस्या और समाधान दोनों उनके मस्तिष्क के भीतर थे।
अगली बार जब आप क्रोधित हों, तो रुकिए और पूछिए – "क्या वास्तव में बाहर कोई समस्या है, या मेरे मन ने उसे समस्या बना दिया है?" फिर उसी पल उस स्थिति का एक सकारात्मक पक्ष ढूँढ़िए। यह अभ्यास आपको अपने अंदर चल रहे युद्ध से मुक्त कर देगा।
5. "पूर्णता से कर्म करो" –
सिद्धांत: हर काम को बिना बहाने, बिना आधे-अधूरेपन के करो।
➤ उदाहरण: एक कुम्हार मिट्टी का घड़ा बनाता है। यदि वह बीच में ही छोड़ दे, आधा घड़ा सूख जाए, तो वह टूट जाता है। लेकिन यदि वह पूरी एकाग्रता से उसे गोल दे, सुखाए, पकाए – तो वह घड़ा न केवल मजबूत बनता है, बल्कि उसमें संगीत भी गूंजता है।
आप जो भी करें – पढ़ना, खाना बनाना, ऑफिस का काम, यहाँ तक कि साँस लेना – पूर्णता से करें। जब आप बिना किसी नकारात्मक विचार के कर्म करते हैं, तो उस कर्म में एक शक्ति पैदा होती है जो समाधानों को अपनी ओर खींचती है।
6. "सकारात्मक, रचनात्मक और सत्यात्मक विचार" –
सिद्धांत: ये तीनों विचारों की शक्तियाँ हैं जो किसी भी समस्या की जड़ काट सकती हैं।
➤ उदाहरण: मान लीजिए आपकी नौकरी चली गई।
सकारात्मक विचार: "यह एक अवसर है, मैं बेहतर काम ढूँढूंगा।"
रचनात्मक विचार: "मैं अपने शौक को व्यवसाय बना सकता हूँ, या नया कौशल सीख सकता हूँ।"
सत्यात्मक विचार: "मैंने अपनी पिछली नौकरी में क्या गलत किया? मैं उसे सुधारूंगा। साथ ही, मैं खुद से झूठ नहीं बोलूंगा कि सब ठीक है, लेकिन न ही डर के झूठ में जीऊंगा।"
इन तीनों को मिलाकर आप एक ऐसा समाधान निकालेंगे जो न तो नकारात्मक है, न अव्यावहारिक, न असत्य। यही विचार मंथन का चमत्कार है।
7. "आंतरिक बैटरी और विचारों का भंडार" –
सिद्धांत: जब आप रोज अच्छे विचारों का संग्रह करते हैं, तो वह आपकी आंतरिक बैटरी बन जाती है।
➤ उदाहरण: एक गिलहरी सर्दियों के लिए बीज जमा करती है। जब बर्फबारी होती है और खाना नहीं मिलता, तो वह उस भंडार से जीती है। ठीक वैसे ही, जब जीवन में कठिन समय आता है – जब चारों ओर नकारात्मकता हो – तो आप अपने पहले से संचित सकारात्मक विचारों (जैसे "मैं कर सकता हूँ", "पिछली बार भी निकला था", "यह भी बीत जाएगा") का सहारा लेते हैं।
एक डायरी बनाएँ – "मेरे सकारात्मक अनुभव"। हर शाम एक अच्छा विचार या घटना लिखें। तीन महीने में आपके पास 90 से अधिक शक्तिशाली विचारों का भंडार होगा। जब मन उदास हो, तो इसे खोलकर पढ़ें – यह आपकी बैटरी रिचार्ज कर देगा।
8. "विचार मंथन से चमत्कार" –
सिद्धांत: जब आप अपने ही सकारात्मक, सत्य, रचनात्मक विचारों को मथते हैं, तो एक नया चमत्कार जन्म लेता है।
➤ उदाहरण:
एक व्यक्ति लगातार असफल हो रहा था। उसने सोचा, "मैं बेकार हूँ" (नकारात्मक)। फिर उसने यह लेख पढ़ा। उसने रोज सुबह कहना शुरू किया – "मैं नई शुरुआत करता हूँ" (सकारात्मक)। फिर उसने सोचा – "क्यों न मैं एक ऐसा कौशल सीखूँ जो मुझे पसंद है? जैसे डिजिटल मार्केटिंग" (रचनात्मक)। फिर उसने स्वीकार किया – "मैंने पहले मेहनत नहीं की थी, यह सच है। अब मैं पूर्णता से करूंगा" (सत्यात्मक)। तीनों के मंथन से उसने एक ऑनलाइन कोर्स बनाया। आज वह लाखों कमा रहा है।चमत्कार का अर्थ जादू नहीं, बल्कि उन संभावनाओं का प्रकट होना है जो पहले आपके नकारात्मक विचारों ने छिपा रखी थीं।
9. "अपने मस्तिष्क को स्वर्ग बनाओ" –
सिद्धांत: बाहर की दुनिया प्रतिबिंब है, असली युद्ध भीतर है।
➤ उदाहरण: दो कमरे – एक में सुंदर फूल, मीठे संगीत, सुगंधित धूप है। दूसरे में कूड़ा, गंदगी, तेज आवाज। आप किस कमरे में रहना चाहेंगे? स्पष्ट है। अब, आपका मस्तिष्क भी एक कमरा है। यदि आप उसमें हर दिन शिकायत, ईर्ष्या, भय, क्रोध का कूड़ा डालते हैं, तो वह दुर्गंध आपके पूरे जीवन में फैल जाएगी। यदि आप उसमें कृतज्ञता, आशा, प्रेम, साहस के फूल लगाते हैं, तो वह स्वर्ग बन जाता है।
तीन सप्ताह का प्रयोग – जब भी कोई नकारात्मक विचार आए, तुरंत उसके विपरीत एक सकारात्मक विचार बोलें। जैसे "मैं थक गया हूँ" के बदले "मैं आराम करूंगा और फिर नई ऊर्जा से जुटूंगा।" 21 दिन में आपका मस्तिष्क नई आदत बना लेगा।
10. "हैप्पी थॉट्स – खुश विचार" –
सिद्धांत: स्वस्थ और प्रसन्न चित्त जीवन के लिए खुश विचार ही मार्गदर्शक हैं।
➤ उदाहरण: एक माँ सुबह अपने बच्चे को स्कूल भेजते हुए कहती है, "तुम्हारा दिन अच्छा जाएगा, तुम सीखोगे और खेलोगे।" बच्चा पूरे दिन उसी आशा के साथ चलता है। वही बच्चा यदि सुने, "तुम फेल हो जाओगे, सब बच्चे तुमसे अच्छे हैं" – तो उसका मन भारी हो जाता है, उसका शरीर भी ढीला पड़ जाता है।
आप अपने लिए वही माँ हैं। हर सुबह आईने में देखकर खुद से बोलें – "प्रिय मैं, तू शक्तिशाली है। आज मैं तेरे साथ हूँ। हर छोटी सी सफलता का जश्न मनाएँगे।" यह कोई नाटक नहीं, यह मस्तिष्क को पुनःप्रोग्राम करने का तरीका है।
अंतिम प्रेरक निष्कर्ष
अधिक गहराई से समझाने के लिए, मैं आपके सामने 'मूर्तिकार और पत्थर' का प्रसंग प्रस्तुत करता हूँ, जो विशेष रूप से आपके 'सत्यात्मक और रचनात्मक' विचारों के दृष्टिकोण को और अधिक प्रभावी ढंग से स्पष्ट करेगा:
प्रेरक प्रसंग: पत्थर के भीतर की मूर्ति
एक बार एक प्रसिद्ध मूर्तिकार एक बड़े और खुरदरे पत्थर को तराश रहा था। एक राहगीर वहीं रुक गया और उसे घंटों तक पत्थर पर हथौड़ी मारते देखता रहा। राहगीर को लगा कि मूर्तिकार पत्थर को नुकसान पहुँचा रहा है, क्योंकि हर चोट के साथ पत्थर के टुकड़े टूटकर गिर रहे थे।
राहगीर ने पूछा, "आप इस बेचारे पत्थर को क्यों तोड़ रहे हैं? इसमें से तो धूल और कंकड़ ही निकल रहे हैं।" (यह नकारात्मक विचार था, जो केवल बर्बादी देख रहा था)।
मूर्तिकार मुस्कुराया और बोला, "मैं इस पत्थर को तोड़ नहीं रहा हूँ। मैं तो बस उस 'अनावश्यक' हिस्से को हटा रहा हूँ जिसने इसके भीतर छिपी एक सुंदर मूर्ति को कैद कर रखा है।" (यह रचनात्मक विचार था)।
मूर्तिकार ने पूरी एकाग्रता और धैर्य के साथ काम जारी रखा। कुछ देर बाद, उस खुरदरे पत्थर की जगह एक अत्यंत सुंदर और शांत बुद्ध की प्रतिमा खड़ी थी। मूर्तिकार ने राहगीर से कहा, "मूर्ति तो पहले से ही इसके अंदर थी, मैंने बस उन बेकार टुकड़ों को हटाया जो उसे प्रकट होने से रोक रहे थे।" (यह सत्यात्मक विचार है)।
जीवन का अर्थ और विचार मंथन
इस प्रसंग का आपके जीवन और विचारों से गहरा संबंध है:
- खुरदरा पत्थर = आपका वर्तमान जीवन और उसमें आने वाली कठिन परिस्थितियाँ।
- धूल और कंकड़ = आपके मन के नकारात्मक विचार, डर और पुरानी मान्यताएं।
- हथौड़ी और छेनी = आपका स्व-अनुशासन और 'विचारों का मंथन'।
- मूर्तिकार = स्वयं आप (स्वयं के उपचारक)।
- सुंदर मूर्ति = आपके भीतर की छिपी हुई असीम शांति और आत्म-शक्ति (चमत्कारिक समाधान)।
समाधान बाहर से कहीं नहीं आना है, वह आपके भीतर ही है। बस नकारात्मक विचारों की उन परतों को हटाना है जिन्होंने उस समाधान को ढक रखा है।
आज ही इस क्षण से, अपने भीतर के उस लेखक, उस निर्देशक, उस कुम्हार, उस गिलहरी और उस मूर्तिकार को जगाएँ। हर साँस नई है। हर सुबह पहला दिन है। आपका मस्तिष्क आपका स्वर्ग है – उसे सजाएँ, उसे गाएँ, उसे विश्वास दिलाएँ कि चमत्कार संभव हैं।
क्योंकि, आप ही वह चमत्कार हैं।
क्योंकि, आप शाश्वत यात्रा पर निकले हैं: हर पल नई शुरुआत
अब बोलो –
“मेरे विचार ही मेरे चमत्कार हैं।”
सतत चिंतन और मनन करते रहें...
आपका साथ यूं ही बना रहे...
शुभकामनाएं...!
- प्रोफेसर (डॉ) मुकेश जैन-
🙏🙏🙏
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-: श्रृंखला के अगले अंक में:-
03- अनंत बुद्धि-स्रोत पर विश्वास करें
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